शिवाम्बु - स्वतः चे मूत्र चे फायदे
खुद के शरीर की इस खास चीज से घर बैठे करें इन बड़े रोगों का इलाज
इंसानी शरीर अपने आप में परिपूर्ण होता है। इसमें अपने आपको स्वस्थ रखने की क्षमता होती है। आवश्यकता है तो अपनी क्षमताओं को पहचानने व समझने की और जरूरत के हिसाब से उसका सही उपयोग करने की। अज्ञान, अधूरा ज्ञान या एकपक्षीय ज्ञान के कारण कई बार कुछ तरीके उपचार में असफल साबित हो जाते हैं। इसलिए आवश्यकता है सही ज्ञान व सही उपयोग की। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी ही चिकित्सा पद्धति के बारे में जिसे स्वमूत्र या शिवाम्बु चिकित्सा पध्दति कहा जाता है।
रोग अनेक दवा एक
दुनियां में रोग मुक्त करने के लिए हजारों दवाईयां उपलब्ध हैं, जिनका रोगों की रोकथाम, उपचार व परहेज के रूप में उपयोग किया जाता है। सभी दवाओं का शरीर के अंगों पर अपना अलग-अलग बुरा प्रभाव पड़ता है। शिवाम्बु या स्वमूत्र बिना किसी दुष्प्रभाव, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली, स्वयं के द्वारा स्वयं के शरीर से अनेक रोगों की आवश्यकतानुसार निर्मित ऐसी दवा है, जिसका उपयोग कान हों या नाक या त्वचा के रोग व आंखों के रोग आदि से बचाव के लिए किया जा सकता है। शिवाम्बु का नियमित सेवन करने वाला व्यक्ति कभी संक्रामक रोग जैसे चिकनगुनियां, चेचक, स्वाइन फ्लू आदि के प्रभाव में नहीं आता है।
शिवाम्बु हानिकारक नहीं
शिवाम्बु शरीर से गुर्दों द्वारा खून शुध्दिकरण से मिलने वाले जीवनपयोगी जल का वह भाग है, जिसमें शरीर के लिए उपयोगी सैकड़ों ऐसे तत्व हैं जो खून में होते हैं, लेकिन जिनका शरीर तत्काल उपयोग नहीं कर पाता और उनको संचय करने व रखने के लिए शरीर में अलग व्यवस्था नहीं होती है। इसलिए उसको विसर्जित करना पड़ता है। ऐसे उपयोगी तत्व जो आवश्यकता से ज्यादा होते हैं, शिवाम्बु के माध्यम से शरीर के बाहर चले जाते हैं।
शिवाम्बु से रोग निदान
स्वादहीन, सुगंधहीन, सुबह अच्छे डायजेशन और स्वास्थ्य का प्रतीक होता है। शिवाम्बु चिकित्सा में रोग के निदान की भी आवश्यकता नहीं होतीहै, क्योंकि शरीर में रोगों की आवश्यकतानुसार ही इसका निर्माण होता है। इसी कारण रोगी को जहां तक हो अपने शिवाम्बु का ही सेवन करना चाहिए। भले ही उसमें रोगों के कारण बदबू भी क्यों न आती हो। शिवाम्बु में बहुत प्रकार के हार्मोन्स होने से इसके सेवन से शारीरिक और मानसिक विकार दूर होने से स्वभाव बदलता है। स्मरण शक्ति तेज होती है। चेहरा चमकने लगता है। मन की शांति बढ़ती है। शारीरिक, मानसिक व आत्मिक विकास में मदद मिलती है।
शिवाम्बु के उपयोग की विधियां
शिवाम्बु का उपयोग अलग-अलग रोगों में या रोगों की रोकथाम हेतु अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पीने के लिए सुबह शिवाम्बु सबसे अच्छा होता है।शिवाम्बु औषधि ही नहीं रासायन है। उपवास के साथ शिवाम्बु का सेवन करने से विशेष लाभ होता है। शिवाम्बु पीने के बाद कम से कम एक घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। आंखों में कान में, मुंह में, एनिमा आदि के रूप में ताजा शिवाम्बु को ही उपयोग में लेना चाहिए, लेकिन त्वचा संबंधी रोगों में जितना पुराना शिवाम्बु पीना, शिवाम्बु का एनिमा लेना, मसाज करना बावासीर वाले भाग को शिवाम्बु से गीला रखना लाभदायक होता है।
शिवाम्बु कब और कितना सेवन करें
1. शिवाम्बु गर्म प्रकृति का होने के कारण सर्दी के मौसम में या कफ प्रकृति वाले इसका अधिकाधिक उपयोग कर सकते हैं। बारिश के मौसम में शिवाम्बु की मात्रा सर्दी की अपेक्षा थोड़ी कम व गर्मी के मौसम में और पित्त प्रकृति वालों का शिवाम्बु का पान अपेक्षाकृत कम करना चाहिए।
2. जो व्यक्ति बुरी आदतों से परेशान है जिसका खानपान तामसिक है उसे शिवाम्बु का अधिक सेवन करना चाहिए ताकि कम समय में बुरी आदतें छूट जाएं। शिवाम्बु पीने से सात्विक खाने की तरफ आकर्षण बढ़ने लगता है।
3. जिन लोगों के शरीर में चर्बी ज्यादा हो तो उन्हें शिवाम्बु का सेवन अधिक करना चाहिए और जो दुबले-पतले हैं उन्हें सीमित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए।
शिवाम्बु से होने वाले तात्कालिक उपचार
1. हिलते हुए दांतों को फिर से मजबूत करने के लिए व दांतों संबंधी अन्य रोगों में ताजा शिवाम्बु मुंह में भरकर कुछ देर घुमाने से रोग ठीक हो जाते हैं।
2. आंखों के सभी रोगों में, नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए, चश्में के नंबर कम करने के लिए, रोजाना तीन चार बार आंखों को ताजे शिवाम्बु से धोना चाहिए।
3. सांप बिच्छु या शरीर में अन्य जहर फैलने पर शिवाम्बु पीने से जहर का प्रभाव खत्म हो जाता है।
4. कानों में शिवाम्बु डालने से कानों की कार्य क्षमता बढ़ती है।
5. पेट के रोगियों को रोजाना सुबह थोड़ी मात्रा में शिवाम्बु लेना चाहिए।
6. स्वमूत्र पान करने से श्वसनतंत्र मजबूत होता है व टी.बी. आदि रोग जल्दी ठीक हो जाते हैं।
7. हथेली और पैरों के तलवों पर शिवाम्बु की मसाज करने से वहां जमें विजातीय तत्व दूर होने लगते हैं और व्यक्ति को अपने रोगों से सहज ही राहत मिलती है।
8. सांस की बीमारी वालों को सीने पर नियमित शिवाम्बु की मसाज करनी चाहिए। इससे फेफड़ाें में जमा कफ बाहर हो जाता है।
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