'राजगृह' वरील तोडफोड चा निषेध, ऑनलाईन
।।नमो बुद्धाय जय भीम साथियों।।
*_बाबा साहब कहते है-_*
*_सुन ऐ नादा, मुझे भी कोई दौलत की कमी नही होती,_*
*_अगर मुझको तेरे सम्मान की कोई फिकर नही होती!_*
*_गगन को चुम रहा होता, मेरा भी ऊंचा सा बंगला_*
*_लड़ाई जो तेरे हको की, मैने कभी लड़ी नही होती!_*
*_जिये होती मेरी भी औलादे, ऐश और आराम का जीवन,_*
*_तुम्हारे बच्चो की खुशियो की मैने, कहानी जो लिखी नही होती!_*
*_छपी होती मेरी भी तस्वीरें, कागजो के इन टुकड़ो पर,_*
*_तेरी खातिर जो मनुओ से, दुश्मनी मैने करी ना होती!_*
*_जहां चाहत थी आजादी की तुझे, जो बैठे-बैठे न मिली होती!_*
*_ बड़ा अफसोस है कि मेरा, रह गया अधुरा इक सपना,_*
*_जो तुम मेरी औलादो ने मिलकर, मेरी निलामी की ना होती......!!*
*अफसोस! जब संगठित ही नही हो पाये तो संघर्ष किस बात का...?? और किसलिए.......???_*
बस जय भीम कहना और जय कारे लगाना ही हमारा कर्म और धर्म बन गया है!,
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